
शुरुआत में क्या था
पेनाइल कैंसर से पीड़ित एक पुरुष को इलाज के लिए भेजा गया। मुख्य ट्यूमर की जाँच और कैंसर की स्टेजिंग के बाद, सबसे अहम सवाल जाँघ के जोड़ों (ग्रोइन) की लिम्फ नोड्स का था। पेनाइल कैंसर लगभग हमेशा सबसे पहले इन्हीं में फैलता है, और उनके ट्यूमर के लक्षणों से फैलाव का काफ़ी ख़तरा था, जिसे सिर्फ़ स्कैन से ख़ारिज नहीं किया जा सकता था।
यह मामला जटिल क्यों था
- दोनों जाँघ के जोड़ों का इलाज ज़रूरी था। पेनाइल कैंसर किसी भी तरफ़ फैल सकता है, इसलिए एक ही इलाज में दोनों तरफ़ की लिम्फ नोड्स निकालनी थीं।
- ओपन ग्रोइन सर्जरी से रिकवरी कठिन होती है। पारंपरिक इंग्वाइनल लिम्फ नोड डिसेक्शन में लंबे चीरे लगते हैं, ऐसी जगह जहाँ घाव खुलने, इन्फ़ेक्शन और पैरों में सूजन का ख़तरा रहता है।
- स्कैन माइक्रोस्कोपिक फैलाव नहीं देख सकते। सिर्फ़ नोड्स निकालकर जाँचने से ही भरोसेमंद स्टेज पता चलती है, जिससे तय होता है कि आगे इलाज चाहिए या नहीं।
इलाज का तरीका
सभी विकल्पों पर पूरी बात करने के बाद डॉ. अंशुमान सिंह ने दोनों तरफ़ रोबोटिक वीडियो-एंडोस्कोपिक इंग्वाइनल लिम्फैडेनेक्टॉमी (रोबोटिक VEIL) की। हर तरफ़ कुछ छोटे चीरों से, बड़ा करके दिखने वाले 3D दृश्य और कलाई की तरह घूमने वाले रोबोटिक उपकरणों से, ओपन ऑपरेशन जितना ही लिम्फ नोड ऊतक दोनों जाँघ के जोड़ों से निकाला गया, जबकि ऊपर की त्वचा को कोई बड़ा चीरा नहीं लगा।
नतीजा
- सही स्टेजिंग: अंतिम पैथोलॉजी pT2 N1 थी, यानी आसपास की लिम्फ नोड्स तक फैलाव की पुष्टि हुई, और सर्जिकल मार्जिन साफ़ थे।
- आसान रिकवरी: मरीज़ जल्दी उठकर चलने लगे और ओपन ग्रोइन सर्जरी के बाद अक्सर होने वाली घाव की परेशानियों के बिना ठीक हुए।
- आगे की साफ़ योजना: नोड्स की सही स्टेजिंग से निगरानी और किसी अतिरिक्त इलाज के फ़ैसले ठोस जानकारी पर हो सके। उनका नियमित फ़ॉलो-अप जारी है।
मरीज़ों के लिए ज़रूरी बातें
- पेनाइल कैंसर में जाँघ के जोड़ों की लिम्फ नोड्स का इलाज उतना ही अहम है जितना दिखने वाले ट्यूमर का।
- हर मरीज़ को लिम्फ नोड सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती। यह ट्यूमर की स्टेज और ग्रेड, और जाँच व स्कैन पर निर्भर करता है।
- जब ग्रोइन सर्जरी ज़रूरी हो, तो उपयुक्त मरीज़ों में मिनिमली इनवेसिव VEIL से वही काम कहीं आसान रिकवरी के साथ हो सकता है।
- लिंग पर कोई घाव या उभार जो कुछ हफ़्तों में न भरे, उसकी जाँच करानी चाहिए, बार-बार इन्फ़ेक्शन मानकर इलाज नहीं।
और पढ़ें: पेनाइल कैंसर और रोबोटिक सर्जरी।
हर मरीज़ अलग होता है। यह कहानी एक मरीज़ के इलाज के बारे में है और इसका मतलब यह नहीं कि सबके नतीजे ऐसे ही होंगे। इसे जानकारी के लिए, मरीज़ की सहमति से और पहचान बताए बिना साझा किया गया है।