
शुरुआत में क्या था
एक मरीज़ को ऐसा ब्लैडर कैंसर था जो ब्लैडर की मांसपेशी वाली दीवार तक पहुँच गया था। इस अवस्था में दूरबीन से ट्यूमर निकालना (TURBT) काफ़ी नहीं होता, क्योंकि कैंसर के ब्लैडर से बाहर फैलने की काफ़ी संभावना होती है।
यह मामला जटिल क्यों था
- पूरा ब्लैडर निकालना ज़रूरी था। मांसपेशी तक पहुँची बीमारी में पेल्विस की लिम्फ नोड्स के साथ रेडिकल सिस्टेक्टॉमी ठीक होने की सबसे अच्छी संभावना देती है।
- पेशाब के लिए शरीर से बाहर नया रास्ता चाहिए था। ब्लैडर निकालने के बाद उसी ऑपरेशन में यूरिनरी डायवर्ज़न बनाना होता है।
- स्टोमा के साथ जीवन के लिए तैयारी चाहिए। घर जाने से पहले मरीज़ और परिवार को इसकी देखभाल में भरोसा होना ज़रूरी था।
इलाज का तरीका
डॉ. अंशुमान सिंह ने दोनों तरफ़ के एक्सटेंडेड पेल्विक लिम्फ नोड डिसेक्शन के साथ रोबोटिक रेडिकल सिस्टेक्टॉमी की। पेशाब के लिए इलियल कंड्यूट बनाया गया: छोटी आँत का एक छोटा हिस्सा अलग करके उससे यूरेटर जोड़े जाते हैं, और उसका सिरा पेट पर एक छोटे छेद (स्टोमा) के रूप में बाहर लाया जाता है, जहाँ से पेशाब एक बैग में जाता है।
नतीजा
- रिकवरी: क़रीबी निगरानी के लिए दो दिन ICU में, फिर सर्जरी के अगले दिन से चलना शुरू।
- स्टोमा की ट्रेनिंग: छुट्टी से पहले मरीज़ और परिवार को स्टोमा और बैग संभालना सिखाया गया।
- पूरा कैंसर निकला: सर्जिकल मार्जिन और लिम्फ नोड्स में कैंसर नहीं मिला।
- स्टोमा अच्छी तरह काम कर रहा है, मरीज़ रोज़मर्रा के कामों पर लौट आए हैं, और फ़ॉलो-अप जारी है।
मरीज़ों के लिए ज़रूरी बातें
- मांसपेशी तक पहुँचे ब्लैडर कैंसर में TURBT से आगे इलाज चाहिए; ज़्यादातर मरीज़ों के लिए रेडिकल सिस्टेक्टॉमी मानक इलाज है।
- इलियल कंड्यूट सबसे आसान और सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला यूरिनरी डायवर्ज़न है, और ज़्यादातर लोग इसके साथ अच्छी तरह ढल जाते हैं।
- रोबोटिक सर्जरी इस बड़े ऑपरेशन के बाद की रिकवरी आसान बना सकती है।
- छुट्टी से पहले स्टोमा की देखभाल की ट्रेनिंग से घर लौटना कहीं आसान हो जाता है।
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हर मरीज़ अलग होता है। यह कहानी एक मरीज़ के इलाज के बारे में है और इसका मतलब यह नहीं कि सबके नतीजे ऐसे ही होंगे। इसे जानकारी के लिए, मरीज़ की सहमति से और पहचान बताए बिना साझा किया गया है।