रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी क्या है
किडनी के कई ट्यूमर किसी दूसरे कारण से कराए गए स्कैन में संयोग से पकड़ में आते हैं। जब ट्यूमर छोटा हो और सही जगह पर हो, तो उसे काटकर निकाला जा सकता है और किडनी की मरम्मत की जा सकती है, पूरा अंग निकाले बिना। इसे पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी कहते हैं। बची हुई किडनी ख़ून छानती रहती है, जो लंबे समय की सेहत के लिए ज़रूरी है।
रोबोटिक तरीके में सर्जन कंसोल पर बैठकर छोटे चीरों से डाले गए पतले उपकरण चलाते हैं और बड़ा 3D दृश्य देखते हैं। इस ऑपरेशन में सीमित समय के अंदर ट्यूमर को सटीक निकालना, खून बहना रोकना और किडनी को दोबारा बनाना होता है, और घूमने वाले उपकरण काटने और टाँके लगाने में मदद करते हैं।
रोबोट अपने-आप ऑपरेशन नहीं करता। हर हरकत सर्जन ही करते हैं, इसलिए मशीन से ज़्यादा सर्जन का अनुभव मायने रखता है। डॉ. सिंह चंदन हॉस्पिटल, लखनऊ में रोबोटिक सर्जरी करते हैं। ऑपरेशन की योजना के लिए परामर्श हॉस्पिटल OPD, गोमती नगर क्लिनिक में या टेलीकंसल्टेशन से होता है।
किसके लिए सही है, और किसके लिए शायद नहीं
किडनी बचाई जा सकती है या नहीं, यह ट्यूमर के आकार, किडनी में उसकी जगह और आपकी किडनी कितना अच्छा काम करती है, इस पर निर्भर करता है। कंट्रास्ट CT या MRI से यह पता चलता है, और स्कोरिंग सिस्टम से बताया जाता है कि ट्यूमर कितना जटिल है।
अक्सर सुझाई जाती है
लगभग 4 सेमी तक के ट्यूमर, और कई 7 सेमी तक के। जिन्हें एक ही किडनी है, दोनों किडनी में ट्यूमर है, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की पुरानी बीमारी है, उनके लिए यह और भी ज़रूरी है।
दूसरे विकल्प बेहतर हो सकते हैं
जो ट्यूमर मुख्य नस या किडनी के बाहर तक बढ़ गए हों, बहुत गहरे या बीच में स्थित ट्यूमर जिन्हें सुरक्षित रूप से अलग न किया जा सके, और कमज़ोर मरीज़ों में छोटी गाँठें जिन्हें सिर्फ़ निगरानी में रखा जा सकता है।
पूरी किडनी निकालने से तुलना के लिए पार्शियल बनाम रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी पढ़ें। किडनी की हर छोटी गाँठ कैंसर नहीं होती, इसलिए कोई भी फ़ैसला करने से पहले स्कैन पर राय लेना ठीक है। ट्यूमर कैसे पकड़े और जाँचे जाते हैं, यह किडनी कैंसर पेज पर है।
ऑपरेशन संक्षेप में
- सर्जरी से पहले। CT या MRI, किडनी की जाँच सहित ख़ून की जाँच और एनेस्थीसिया के लिए फ़िटनेस जाँच। खून पतला करने वाली और डायबिटीज़ की दवाओं की समीक्षा होती है।
- सर्जरी के दौरान। जनरल एनेस्थीसिया में किडनी को खोला जाता है, ट्यूमर ढूँढा जाता है (कभी-कभी अंदर अल्ट्रासाउंड प्रोब से), और उसे थोड़ी स्वस्थ परत के साथ काटकर निकाला जाता है। ज़रूरत पड़ने पर किडनी में खून का बहाव थोड़ी देर के लिए रोका जाता है। फिर किडनी की परत-दर-परत बारीक टाँकों से मरम्मत की जाती है।
- समय और अस्पताल में दिन। ऑपरेशन में आमतौर पर लगभग दो से तीन घंटे लगते हैं, और ज़्यादातर मरीज़ दो से चार दिन अस्पताल में रहते हैं। किडनी के पास एक-दो दिन के लिए ड्रेन आम है।
- पैथोलॉजी। रिपोर्ट से ट्यूमर का प्रकार, ग्रेड और किनारे साफ़ हैं या नहीं, यह पता चलता है। छोटी गाँठों में से कुछ सौम्य (बिनाइन) निकलती हैं।
क़दम-दर-क़दम ब्योरा रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी (RAPN): क्या होता है और क्या उम्मीद रखें में है।
दूसरे विकल्पों से तुलना
सीमित ट्यूमर के लिए मुख्य विकल्प हैं: सिर्फ़ ट्यूमर निकालना, पूरी किडनी निकालना, ट्यूमर को गर्मी या ठंड से ख़त्म करना (एब्लेशन), या छोटी गाँठ को स्कैन से निगरानी में रखना। जब सुरक्षित रूप से संभव हो, तो पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी को आमतौर पर पसंद किया जाता है, क्योंकि इनमें कैंसर पर नियंत्रण लगभग बराबर रहता है और किडनी का ज़्यादा काम बचा रहता है।
| विकल्प | इसमें क्या होता है | किन बातों पर ध्यान दें |
|---|---|---|
| रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी | छोटे चीरे, ट्यूमर निकाला जाता है, किडनी की मरम्मत होती है | किडनी का काम बचा रहता है। ओपन सर्जरी के मुक़ाबले आमतौर पर कम खून बहता है और अस्पताल में कम दिन लगते हैं। ख़ास जोखिम हैं खून बहना और पेशाब का रिसाव। |
| ओपन या लैप्रोस्कोपिक पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी | बड़ा चीरा, या रोबोट के बिना कीहोल सर्जरी | मक़सद वही है। ओपन सर्जरी में घाव बड़ा और रिकवरी लंबी होती है। कुछ ट्यूमर में लैप्रोस्कोपिक तरीके से मरम्मत कठिन होती है। |
| रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी | पूरी किडनी निकाली जाती है | बड़े, बीच में स्थित या नस में बढ़े ट्यूमर के लिए सही है। लंबे समय में किडनी का काम घटने का जोखिम ज़्यादा रहता है। |
| एब्लेशन | सुइयों से गर्मी या ठंड देकर ट्यूमर का इलाज | छोटे ट्यूमर में उन लोगों के लिए जो ऑपरेशन नहीं करा सकते। लंबे समय के नतीजों पर जानकारी कम है, और ट्यूमर का दोबारा इलाज करना पड़ सकता है। |
| एक्टिव सर्विलांस | नियमित स्कैन | बुज़ुर्ग या कमज़ोर मरीज़ों में छोटी गाँठों के लिए, क्योंकि कई धीरे बढ़ती हैं। देखें किडनी कैंसर। |
सर्जरी के तरीकों की तुलना रोबोटिक, ओपन और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में है।
रिकवरी
- चलना ऑपरेशन वाले दिन या अगले दिन से शुरू हो जाता है।
- ज़्यादातर मरीज़ दो से चार दिन में घर चले जाते हैं।
- डेस्क का काम अक्सर दो-तीन हफ़्तों में शुरू हो जाता है। भारी सामान उठाने से लगभग चार से छह हफ़्ते बचना होता है।
- किडनी का काम ख़ून की जाँच से देखा जाता है, और फ़ॉलो-अप स्कैन पैथोलॉजी के हिसाब से तय अंतराल पर होते हैं।
- शुरू के हफ़्तों में पेशाब में ज़्यादा खून, बगल में तेज़ दर्द, बुखार या चक्कर आए तो तुरंत सर्जन से संपर्क करें।
जोखिम और साइड-इफ़ेक्ट
हर ऑपरेशन की तरह इसमें भी सामान्य जोखिम हैं: खून बहना, संक्रमण, खून के थक्के और एनेस्थीसिया की दिक़्क़तें। पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी से जुड़े ख़ास जोखिम ये हैं:
- मरम्मत की हुई किडनी से खून बहना। कभी-कभी कुछ दिन बाद दिखता है, और कभी-कभी इसके लिए प्रक्रिया या ख़ून चढ़ाना पड़ता है।
- पेशाब का रिसाव मरम्मत की जगह से। इसे आमतौर पर ड्रेन या स्टेंट से संभाला जाता है।
- निकाले गए नमूने के किनारे पर कैंसर। यह कम होता है और अक्सर नज़दीकी फ़ॉलो-अप से संभाला जाता है।
- किडनी के काम में कुछ कमी। आमतौर पर पूरी किडनी निकालने के मुक़ाबले बहुत कम।
- योजना में बदलाव। कभी-कभी ट्यूमर सुरक्षित रूप से न निकल पाए तो पूरी किडनी निकालनी पड़ती है। यह बात सर्जरी से पहले समझाई जाती है।
किसी भी सर्जन से यह पूछना ठीक है कि वे कितनी पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी करते हैं और कितनी बार किडनी निकालनी पड़ी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी पूरी किडनी निकालने से बेहतर है?
जिन ट्यूमर को सुरक्षित रूप से निकाला जा सकता है, ख़ासकर छोटे ट्यूमर, उनमें कैंसर पर नियंत्रण आमतौर पर लगभग बराबर रहता है और किडनी का ज़्यादा काम बचा रहता है। यह संभव है या नहीं, ट्यूमर के आकार और जगह पर निर्भर करता है।
क्या ऑपरेशन रोबोट करता है?
नहीं। हर हरकत सर्जन कंसोल से नियंत्रित करते हैं। रोबोट एक सटीक उपकरण है, अपने-आप ऑपरेशन करने वाली मशीन नहीं।
रिकवरी में कितना समय लगता है?
ज़्यादातर मरीज़ दो से चार दिन में घर चले जाते हैं और दो-तीन हफ़्तों में डेस्क के काम पर लौट आते हैं। भारी सामान उठाने से लगभग चार से छह हफ़्ते बचना होता है।
क्या ऑपरेशन के दौरान किडनी निकालनी पड़ सकती है?
कभी-कभी। अगर ट्यूमर सुरक्षित रूप से न निकल पाए या खून बहना न रुके, तो पूरी किडनी निकालनी पड़ सकती है। यह सर्जरी से पहले समझाया जाता है और उस पर सहमति ली जाती है।
क्या किडनी की हर छोटी गाँठ कैंसर होती है?
नहीं। छोटी गाँठों में से कुछ सौम्य होती हैं। स्कैन और डॉक्टर की राय से तय होता है कि ऑपरेशन करना है, निगरानी रखनी है या इलाज करना है।
परामर्श में क्या साथ लाएँ?
अपनी CT या MRI फ़िल्म और रिपोर्ट, हाल की किडनी जाँच के नतीजे और दवाओं की सूची साथ लाएँ। टेलीकंसल्टेशन के लिए रिपोर्ट पहले से भेजी जा सकती हैं।
