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रोबोटिक सिस्टेक्टॉमी क्या है

रेडिकल सिस्टेक्टॉमी में पूरा ब्लैडर और पेल्विस की लिम्फ नोड्स निकाली जाती हैं, क्योंकि ब्लैडर कैंसर सबसे पहले इन्हीं में फैलता है। पुरुषों में आमतौर पर प्रोस्टेट और सीमिनल वेसिकल्स भी ब्लैडर के साथ निकाली जाती हैं। महिलाओं में कैंसर की ज़रूरत हो तो गर्भाशय और योनि का कुछ हिस्सा निकाला जा सकता है, और कुछ मरीज़ों में आसपास के अंग बचाए जा सकते हैं। इसके बाद आँत के एक टुकड़े से पेशाब का नया रास्ता बनाया जाता है।

रोबोटिक तरीके में ऑपरेशन पेट पर लगे छोटे चीरों से होता है। सर्जन कंसोल से उपकरण चलाते हैं और पेल्विस का बड़ा, 3D दृश्य देखते हैं। कैंसर का ऑपरेशन ओपन सर्जरी जैसा ही रहता है। असली बात यह है कि कैंसर पूरा निकले, लिम्फ नोड्स अच्छी तरह साफ़ हों और ऑपरेशन के पहले-बाद में अच्छी देखभाल मिले। यह सर्जन और टीम के अनुभव पर निर्भर करता है, रोबोट पर नहीं।

डॉ. सिंह चंदन हॉस्पिटल, लखनऊ में रोबोटिक सर्जरी करते हैं। ऑपरेशन की योजना के लिए परामर्श हॉस्पिटल OPD, गोमती नगर क्लिनिक में या टेलीकंसल्टेशन से होता है।

ब्लैडर निकालना कब सुझाया जाता है

इन स्थितियों में सिस्टेक्टॉमी कैंसर ठीक करने के उद्देश्य से किया जाने वाला मानक इलाज है:

मांसपेशी तक पहुँचा ब्लैडर कैंसर

कैंसर ब्लैडर की मांसपेशी (T2 या ज़्यादा) तक पहुँच गया हो, दूर के अंगों तक न फैला हो, और मरीज़ बड़े ऑपरेशन के लिए फ़िट हो। अक्सर पहले कीमोथेरेपी दी जाती है।

बार-बार लौटने वाला हाई-रिस्क कैंसर

हाई-ग्रेड कैंसर जो BCG के बाद भी लौट आया हो, या जिसे सिर्फ़ खुरचने (TURBT) और ब्लैडर में दवा डालने से संभालना ज़्यादा जोखिम भरा लगे।

मांसपेशी तक पहुँचे कुछ मरीज़ों में ब्लैडर बचाने वाला इलाज संभव है। इसकी चर्चा रेडिकल सिस्टेक्टॉमी या ब्लैडर बचाना? में है। अगर अभी TURBT हुआ है, तो TURBT की पैथोलॉजी रिपोर्ट कैसे पढ़ें में वे शब्द समझाए गए हैं जो सर्जन इस्तेमाल करेंगे।

ऑपरेशन संक्षेप में

  1. सर्जरी से पहले। स्टेजिंग स्कैन, किडनी और दिल की जाँच और पोषण देखा जाता है। धूम्रपान बंद करने और फ़िटनेस बढ़ाने से जटिलताएँ कम होती हैं। इलियल कंड्यूट की योजना हो तो स्टोमा नर्स पहले मिलती हैं।
  2. लिम्फ नोड डिसेक्शन। स्टेजिंग और इलाज के लिए पेल्विस की रक्त नलियों के आसपास की नोड्स निकाली जाती हैं।
  3. ब्लैडर निकालना। ब्लैडर और कैंसर के हिसाब से ज़रूरी दूसरे अंग अलग करके एक छोटे चीरे से बाहर निकाले जाते हैं।
  4. पेशाब का नया रास्ता। आँत के एक टुकड़े से पेशाब का नया रास्ता बनाया जाता है और किडनी से आने वाली नलियाँ (यूरेटर) उससे जोड़ी जाती हैं। यह रोबोट से शरीर के अंदर या एक छोटे चीरे से किया जा सकता है।
  5. समय और भर्ती। ऑपरेशन में अक्सर पाँच से आठ घंटे लगते हैं। आमतौर पर सात से दस दिन अस्पताल में रहना पड़ता है।
  6. पैथोलॉजी। आख़िरी रिपोर्ट आमतौर पर एक-दो हफ़्ते में आती है, जिसमें सही स्टेज और लिम्फ नोड की स्थिति मिलती है और आगे का इलाज तय होता है।

क़दम-दर-क़दम जानकारी रोबोटिक रेडिकल सिस्टेक्टॉमी (RARC): ब्लैडर निकालने से पहले क्या जानें में है।

पेशाब का नया रास्ता: विकल्प

इलियल कंड्यूट

आँत का एक छोटा हिस्सा पेशाब को पेट पर बने छेद (स्टोमा) तक ले जाता है, जहाँ से पेशाब एक बैग में जाता है। यह सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला विकल्प है और ज़्यादातर मरीज़ों के लिए ठीक रहता है, बुज़ुर्ग और दूसरी बीमारियों वाले मरीज़ भी इसमें शामिल हैं।

नियोब्लैडर

आँत के बड़े टुकड़े से एक थैली बनाकर यूरेथ्रा से जोड़ी जाती है, जिससे पेशाब सामान्य तरीके से किया जा सकता है। यह चुने हुए मरीज़ों के लिए है, जिनकी यूरेथ्रा और किडनी ठीक हों और जो ब्लैडर ट्रेनिंग और कभी-कभी खुद कैथेटर डालना सीखने को तैयार हों।

सही विकल्प कैंसर की जगह, किडनी और आँत की सेहत, आपकी फ़िटनेस और आपकी अपनी पसंद पर निर्भर करता है। ऑपरेशन से पहले इस पर विस्तार से बात होती है।

दूसरे तरीकों से तुलना

तरीकाक्या होता हैध्यान देने की बातें
रोबोटिक सिस्टेक्टॉमीछोटे चीरे, ब्लैडर और नोड्स निकालना, नया रास्ता बनानारैंडमाइज़्ड ट्रायल में कैंसर के नतीजे ओपन सर्जरी जैसे रहे और ख़ून कम बहा। फिर भी यह बड़ा ऑपरेशन है और जटिलताएँ होती हैं।
ओपन सिस्टेक्टॉमीपेट पर एक लंबा चीराकैंसर का ऑपरेशन वही है। ख़ून ज़्यादा बहता है और रिकवरी धीमी हो सकती है।
ब्लैडर बचाना (ट्राइमोडैलिटी)पूरा TURBT, फिर कीमोथेरेपी और रेडिएशन साथ मेंसावधानी से चुने गए मरीज़ों में, जिनमें एक छोटा ट्यूमर हो, ब्लैडर बच सकता है। नज़दीकी फ़ॉलो-अप ज़रूरी है और बाद में ब्लैडर निकालना पड़ सकता है।

सर्जरी के तरीकों की व्यापक तुलना रोबोटिक, ओपन और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में है।

रिकवरी

  • एन्हांस्ड रिकवरी पाथवे का उद्देश्य है जल्दी चलना, जल्दी खाना, दर्द पर अच्छा नियंत्रण और बेवजह की नलियाँ हटाना।
  • आँत का काम पहले कुछ दिनों में लौट आता है। आमतौर पर सात से दस दिन अस्पताल में रहना पड़ता है, और जटिलता हो तो ज़्यादा।
  • घर जाने से पहले आपको और आपके परिवार को स्टोमा या नियोब्लैडर की देखभाल सिखाई जाती है।
  • कई हफ़्ते थकान रहती है। सामान्य गतिविधि में आमतौर पर छह से बारह हफ़्ते लगते हैं।
  • फ़ॉलो-अप में स्कैन, किडनी फ़ंक्शन और विटामिन B12 की जाँच और पेशाब के रास्ते की जाँच शामिल है।

जोखिम और साइड इफ़ेक्ट

ज़्यादातर यूरोलॉजिकल ऑपरेशनों की तुलना में सिस्टेक्टॉमी में जोखिम ज़्यादा है। संभावित दिक्कतें:

  • आँत की दिक्कतें। आँत का काम देर से लौटना, रुकावट, या कभी-कभार आँत के जोड़ से रिसाव।
  • संक्रमण और ख़ून बहना। पेशाब या घाव में संक्रमण, ख़ून बहना और ख़ून के थक्के।
  • पेशाब के रास्ते की दिक्कतें। रिसाव, यूरेटर के जोड़ पर सिकुड़न, या स्टोमा के आसपास त्वचा में जलन और हर्निया।
  • यौन क्षमता। पुरुषों में इरेक्शन की समस्या आम है। महिलाओं में योनि की सर्जरी से जुड़े बदलाव हो सकते हैं।
  • विटामिन B12 की कमी। कुछ आँत के हिस्सों के साथ लंबे समय में यह जोखिम रहता है, इसलिए हर साल स्तर जाँचा जाता है।
  • दोबारा भर्ती। कुछ मरीज़ छुट्टी के बाद दोबारा भर्ती होते हैं, आमतौर पर संक्रमण या पानी की कमी से।

किसी भी सर्जन से पूछना ठीक है कि वे साल में कितनी सिस्टेक्टॉमी करते हैं और जटिलताओं को कैसे संभालते हैं।

आम सवाल

क्या रोबोटिक सिस्टेक्टॉमी ओपन से बेहतर है?

रैंडमाइज़्ड ट्रायल में कैंसर के नतीजे एक जैसे रहे। रोबोटिक में ख़ून कम बह सकता है, लेकिन यह फिर भी बड़ा ऑपरेशन है और जटिलताओं की दर लगभग समान है। सर्जन और टीम का अनुभव सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

ऑपरेशन में कितना समय लगता है और कितने दिन भर्ती रहना पड़ता है?

ऑपरेशन में अक्सर पाँच से आठ घंटे लगते हैं, और आमतौर पर सात से दस दिन अस्पताल में रहना पड़ता है।

क्या ऑपरेशन के बाद बैग लगाना पड़ेगा?

इलियल कंड्यूट में हाँ, पेशाब पेट पर लगे छोटे बैग में जाता है। नियोब्लैडर में पेशाब सामान्य तरीके से होता है, लेकिन यह सिर्फ़ चुने हुए मरीज़ों के लिए है।

क्या ब्लैडर निकालने से बचा जा सकता है?

मांसपेशी तक पहुँचे कुछ चुने हुए मरीज़ों में ब्लैडर बचाने वाला इलाज एक विकल्प है, पर हर मरीज़ के लिए नहीं। आपकी रिपोर्ट से पता चलेगा कि यह आप पर लागू होता है या नहीं।

क्या कीमोथेरेपी भी चाहिए?

मांसपेशी तक पहुँचे कैंसर के कई मरीज़ों को, जो इसके लिए फ़िट हों, सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी दी जाती है। सर्जरी के बाद आगे का इलाज आख़िरी पैथोलॉजी रिपोर्ट पर निर्भर करता है।

परामर्श में क्या साथ लाएँ?

TURBT की पैथोलॉजी रिपोर्ट, CT या MRI स्कैन, हाल की ख़ून की जाँचें (किडनी फ़ंक्शन सहित) और अपनी दवाओं की सूची लाएँ। टेलीकंसल्टेशन के लिए रिपोर्ट पहले से भेजी जा सकती हैं।

ब्लैडर निकालने की सलाह मिली है?

परामर्श में आपकी रिपोर्ट देखकर हर विकल्प समझाया जाता है, रोबोटिक हो या नहीं।

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